Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.133.15: दो क्षण भी जलते रहना अच्छा है; परन्तु बहुत देर तक धुआँ छोड़ते हुए सुलगते रहना अच्छा नहीं है। किसी भी राजा के घर में अति कठोर या अति कोमल स्वभाव वाला व्यक्ति जन्म नहीं लेना चाहिए ॥15॥ | mahabharat अध्याय 5.133: कुन्तीके द्वारा विदुलोपाख्यानका आरम्भ, विदुलाका रणभूमिसे भागकर आये हुए अपने पुत्रको कड़ी फटकार देकर पुन: युद्धके लिये उत्साहित करना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मुहूर्तं ज्वलितं श्रेयो न च धूमायितं चिरम्।
मा ह स्म कस्यचिद् गेहे जनि राज्ञ: खरो मृदु:॥ १५॥
अनुवाद
दो क्षण भी जलते रहना अच्छा है; परन्तु बहुत देर तक धुआँ छोड़ते हुए सुलगते रहना अच्छा नहीं है। किसी भी राजा के घर में अति कठोर या अति कोमल स्वभाव वाला व्यक्ति जन्म नहीं लेना चाहिए ॥15॥
It is good to remain lit for even two moments; but it is not good to smoulder for a long time emitting smoke. A person of very harsh or very gentle nature should not be born in the house of any king. ॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥