श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 130: दुर्योधनके षड्यन्त्रका सात्यकिद्वारा भंडाफोड़, श्रीकृष्णकी सिंहगर्जना तथा धृतराष्ट्र और विदुरका दुर्योधनको पुन: समझाना  »  श्लोक 9-10h
 
 
श्लोक  5.130.9-10h 
तेषां पापमभिप्रायं पापानां दुष्टचेतसाम्॥ ९॥
इङ्गितज्ञ: कवि: क्षिप्रमन्वबुद्धॺत सात्यकि:।
 
 
अनुवाद
विद्वान सात्यकि दूसरों के हाव-भाव से ही उनके मन की बात जान लेते थे। वे शीघ्र ही उन दुष्ट-चित्त पापियों के बुरे इरादों को समझ लेते थे।
 
The learned Satyaki was capable of understanding the thoughts of others just by their gestures. He soon understood the evil intentions of those evil-minded sinners. 9 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)