श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 130: दुर्योधनके षड्यन्त्रका सात्यकिद्वारा भंडाफोड़, श्रीकृष्णकी सिंहगर्जना तथा धृतराष्ट्र और विदुरका दुर्योधनको पुन: समझाना  »  श्लोक 17-19h
 
 
श्लोक  5.130.17-19h 
सात्यकेस्तद् वच: श्रुत्वा विदुरो दीर्घदर्शिवान्॥ १७॥
धृतराष्ट्रं महाबाहुमब्रवीत् कुरुसंसदि।
राजन् परीतकालास्ते पुत्रा: सर्वे परंतप॥ १८॥
अशक्यमयशस्यं च कर्तुं कर्म समुद्यता:।
 
 
अनुवाद
सात्यकि के ये वचन सुनकर दूरदर्शी विदुर ने कौरव सभा में महाबली धृतराष्ट्र से कहा - 'हे राजन! ऐसा प्रतीत होता है कि आपके सभी पुत्र मृत्यु के पूर्णतया आश्रित हो गए हैं। इसीलिए वे इस अप्रतिष्ठित एवं असम्भव कार्य पर तुले हुए हैं।'
 
Hearing these words of Satyaki, the far-sighted Vidur said to the mighty Dhritarashtra in the Kaurava assembly - 'O king! It seems that all your sons have become completely dependent on death. That is why they are bent upon doing this dishonorable and impossible act. 17-18 1/2"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)