श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 130: दुर्योधनके षड्यन्त्रका सात्यकिद्वारा भंडाफोड़, श्रीकृष्णकी सिंहगर्जना तथा धृतराष्ट्र और विदुरका दुर्योधनको पुन: समझाना  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  5.130.16-17h 
इमं हि पुण्डरीकाक्षं जिघृक्षन्त्यल्पचेतस:॥ १६॥
पटेनाग्निं प्रज्वलितं यथा बाला यथा जडा:।
 
 
अनुवाद
जैसे बालक और मंदबुद्धि लोग जलती हुई अग्नि को कपड़े में बाँधना चाहते हैं, वैसे ही ये मंदबुद्धि कौरव इन कमलनेत्र भगवान श्रीकृष्ण को यहाँ कैद करना चाहते हैं।' 16 1/2॥
 
Just as children and dull-witted people want to tie a burning fire in a cloth, in the same way these dull-witted Kauravas want to imprison this lotus-eyed Lord Shri Krishna here.' 16 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)