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श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 13: नहुषका इन्द्राणीको कुछ कालकी अवधि देना, इन्द्रका ब्रह्महत्यासे उद्धार तथा शचीद्वारा रात्रिदेवीकी उपासना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  5.13.23 
प्रणष्टे तु तत: शक्रे शची शोकसमन्विता।
हा शक्रेति तदा देवी विललाप सुदु:खिता॥ २३॥
 
 
अनुवाद
जब इंद्र पुनः अदृश्य हो गए, तब देवी शची शोक में डूब गईं और अत्यंत दुखी होकर विलाप करने लगीं, 'हे इंद्र! हे इंद्र!'
 
When Indra again disappeared, Goddess Sachi was drowned in grief and became extremely sad and started wailing saying, 'Oh Indra! Oh Indra!'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)