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mahabharat 5.13.19: युधिष्ठिर! इन्द्र ने ब्राह्मण हत्या का पाप वृक्षों, नदियों, पर्वतों, पृथ्वी और स्त्रियों में बाँट दिया।   |   mahabharat अध्याय 5.13: नहुषका इन्द्राणीको कुछ कालकी अवधि देना, इन्द्रका ब्रह्महत्यासे उद्धार तथा शचीद्वारा रात्रिदेवीकी उपासना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.13.19 
विभज्य ब्रह्महत्यां तु वृक्षेषु च नदीषु च।
पर्वतेषु पृथिव्यां च स्त्रीषु चैव युधिष्ठिर॥ १९॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! इन्द्र ने ब्राह्मण हत्या का पाप वृक्षों, नदियों, पर्वतों, पृथ्वी और स्त्रियों में बाँट दिया।
 
Yudhishthira! Indra divided the sin of killing a brahmin among trees, rivers, mountains, earth and women.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)