श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 129: धृतराष्ट्रका गान्धारीको बुलाना और उसका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  5.129.54 
न लोभादर्थसम्पत्तिर्नराणामिह दृश्यते।
तदलं तात लोभेन प्रशाम्य भरतर्षभ॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
हे भरतपितामह! इस संसार में केवल लोभ से कोई धन प्राप्त नहीं कर सकता; अतः लोभ से कुछ भी प्राप्त नहीं होने वाला। आपको पाण्डवों के साथ संधि कर लेनी चाहिए।'
 
O great father of Bharata! In this world, nobody seems to be able to obtain wealth merely by being greedy; hence, nothing is going to be achieved by greed. You should make a treaty with the Pandavas.'
 
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि भगवद्यानपर्वणि गान्धारीवाक्ये एकोनत्रिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १२९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत भगवद्यानपर्वमें गान्धारीवाक्यविषयक एक सौ उनतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १२९॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)