श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 129: धृतराष्ट्रका गान्धारीको बुलाना और उसका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  5.129.50 
अमर्षवशमापन्नो मा कुरूंस्तात जीघन:।
एषा हि पृथिवी कृत्स्ना मा गमत् त्वत्कृते वधम्॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
तात! क्रोध के वशीभूत होकर समस्त कौरवों को मत मरवाओ। यह सम्पूर्ण भूमण्डल तुम्हारे लिए नष्ट न हो जाए। 50॥
 
‘Tat! Do not get all the Kauravas killed under the influence of anger. This entire planet should not be destroyed for you. 50॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)