श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 129: धृतराष्ट्रका गान्धारीको बुलाना और उसका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 13-14h
 
 
श्लोक  5.129.13-14h 
राष्ट्रप्रदाने मूढस्य बालिशस्य दुरात्मन:॥ १३॥
दु:सहायस्य लुब्धस्य धृतराष्ट्रोऽश्नुते फलम्।
 
 
अनुवाद
राजा धृतराष्ट्र स्वयं इस कारण दुःख भोग रहे हैं कि उन्होंने अपना राज्य एक मूर्ख, अज्ञानी, लोभी और दुष्ट बुद्धि वाले पुत्र को सौंप दिया है, जिसके दुष्ट सहयोगी भी हैं। ॥13 1/2॥
 
King Dhritarashtra himself is facing the consequences of having handed over his kingdom to a foolish, ignorant, greedy and evil-minded son who has evil aides. ॥ 13 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)