श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 128: श्रीकृष्णका दुर्योधनको फटकारना और उसे कुपित होकर सभासे जाते देख उसे कैद करनेकी सलाह देना  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  5.128.50 
राजन् दुर्योधनं बद्‍ध्वा तत: संशाम्य पाण्डवै:।
त्वत्कृते न विनश्येयु: क्षत्रिया: क्षत्रियर्षभ॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! दुर्योधन को बन्दी बनाओ और पाण्डवों से सन्धि कर लो। हे पराक्रमी क्षत्रिय! तुम्हारे कारण समस्त क्षत्रियों का नाश हो जाए।॥50॥
 
‘O King! Imprison Duryodhan and enter into a treaty with the Pandavas. O mighty Kshatriya! It may happen that all the Kshatriyas are destroyed because of you.'॥ 50॥
 
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि भगवद्यानपर्वणि कृष्णवाक्ये अष्टाविंशत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १२८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत भगवद्यानपर्वमें श्रीकृष्णवाक्यविषयक एक सौ अट्ठाईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १२८॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)