श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 128: श्रीकृष्णका दुर्योधनको फटकारना और उसे कुपित होकर सभासे जाते देख उसे कैद करनेकी सलाह देना  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  5.128.47 
तान् बद्‍ध्वा धर्मपाशैश्च स्वैश्च पाशैर्जलेश्वर:।
वरुण: सागरे यत्तो नित्यं रक्षति दानवान्॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
तब से जल के स्वामी वरुण, धर्म और वरुण नामक पाश में बाँधकर प्रतिदिन जागते रहते हैं और दैत्यों को समुद्र की सीमा में ही रखते हैं॥ 47॥
 
‘Since then Varuna, the lord of water, having bound them in the Pāśa of Dharma and Vāruṇa, remains vigilant every day and keeps the demons within the boundaries of the ocean.॥ 47॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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