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श्लोक 5.128.33  |
भीष्मस्याथ वच: श्रुत्वा दाशार्ह: पुष्करेक्षण:।
भीष्मद्रोणमुखान् सर्वानभ्यभाषत वीर्यवान्॥ ३३॥ |
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| अनुवाद |
| भीष्म की यह बात सुनकर महाबली दशार्ह कुलनन्दन कमलनयन श्रीकृष्ण ने भीष्म तथा द्रोण आदि सभी से इस प्रकार कहा- 33॥ |
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| Hearing this statement of Bhishma, the mighty Dasharha Kulanandan Kamalanayan Shri Krishna said to Bhishma and Drona etc. all like this - 33॥ |
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