श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 128: श्रीकृष्णका दुर्योधनको फटकारना और उसे कुपित होकर सभासे जाते देख उसे कैद करनेकी सलाह देना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.128.2 
लप्स्यसे वीरशयनं काममेतदवाप्स्यसि।
स्थिरो भव सहामात्यो विमर्दो भविता महान्॥ २॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन! तुम्हें युद्धभूमि में वीरों की शय्या मिलेगी। तुम्हारी यह इच्छा अवश्य पूर्ण होगी। तुम और तुम्हारे मंत्री धैर्यपूर्वक रहो। अब बहुत बड़ा नरसंहार होने वाला है।॥ 2॥
 
‘Duryodhan! You will get a bed of heroes on the battlefield. This wish of yours will be fulfilled. You and your ministers should stay patiently. Now a huge massacre is going to take place.॥ 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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