श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 128: श्रीकृष्णका दुर्योधनको फटकारना और उसे कुपित होकर सभासे जाते देख उसे कैद करनेकी सलाह देना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.128.17 
यच्चैभ्यो याचमानेभ्य: पित्र्यमंशं न दित्ससि।
तच्च पाप प्रदातासि भ्रष्टैश्वर्यो निपातित:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
हे पापी! तू पाण्डवों के माँगने पर भी उन्हें पैतृक राज्य नहीं दे रहा है। जब तू युद्धभूमि में नष्ट हो जाएगा और तेरा धन लूट लिया जाएगा, तब तुझे राज्य देना ही पड़ेगा॥17॥
 
You sinner! You are refusing to give the ancestral kingdom to the Pandavas even after they beg. You will have to give the same when you will be destroyed in the battlefield and will be robbed of your wealth.॥ 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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