श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 128: श्रीकृष्णका दुर्योधनको फटकारना और उसे कुपित होकर सभासे जाते देख उसे कैद करनेकी सलाह देना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  5.128.13 
सह मात्रा प्रदग्धुं तान् बालकान् वारणावते।
आस्थित: परमं यत्नं न समृद्धं च तत् तव॥ १३॥
 
 
अनुवाद
तुमने पाण्डवों को उनकी माता सहित वारणावत नगरी में बालक अवस्था में ही जला डालने का बड़ा प्रयत्न किया था, परन्तु तुम्हारा उद्देश्य सफल नहीं हुआ॥13॥
 
You made a great effort to burn the Pandavas along with their mother in the city of Varanavat when they were children, but your purpose was not successful.॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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