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mahabharat 5.127.2: केशव! ऐसी बातें कहने से पहले तुम्हें अच्छी तरह सोच लेना चाहिए। तुम मुझ पर दोषारोपण करके मेरी निन्दा कर रहे हो॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 5.127: श्रीकृष्णको दुर्योधनका उत्तर, उसका पाण्डवोंको राज्य न देनेका निश्चय   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 127: श्रीकृष्णको दुर्योधनका उत्तर, उसका पाण्डवोंको राज्य न देनेका निश्चय  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.127.2 
प्रसमीक्ष्य भवानेतद् वक्तुमर्हति केशव।
मामेव हि विशेषेण विभाष्य परिगर्हसे॥ २॥
 
 
अनुवाद
केशव! ऐसी बातें कहने से पहले तुम्हें अच्छी तरह सोच लेना चाहिए। तुम मुझ पर दोषारोपण करके मेरी निन्दा कर रहे हो॥ 2॥
 
Keshav! You should think well before saying such things. You are criticizing me by specifically blaming me.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)