श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 127: श्रीकृष्णको दुर्योधनका उत्तर, उसका पाण्डवोंको राज्य न देनेका निश्चय  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.127.17 
ते वयं वीरशयनं प्राप्स्यामो यदि संयुगे।
अप्रणम्यैव शत्रूणां न नस्तप्स्यन्ति माधव॥ १७॥
 
 
अनुवाद
अतः हे माधव! यदि हम लोग शत्रुओं के सामने न झुकें और युद्ध में मृत्युशय्या पर न मरें, तो हमारे भाई-बन्धु इससे दुःखी नहीं होंगे॥17॥
 
‘Therefore, Madhava! If we do not bow down before our enemies and die on the deathbed in battle, then our brothers and relatives will not be saddened by this.॥ 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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