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श्लोक 5.127.16  |
मुख्यश्चैवैष नो धर्म: क्षत्रियाणां जनार्दन।
यच्छयीमहि संग्रामे शरतल्पगता वयम्॥ १६॥ |
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| अनुवाद |
| जनार्दन! हम क्षत्रियों का यही मुख्य कर्तव्य है कि युद्ध के समय हमें बाणों की शय्या पर सोने का अवसर मिले॥16॥ |
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| Janardan! It is the main duty of us Kshatriyas that we should get the opportunity to sleep on a bed of arrows during the war.॥ 16॥ |
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