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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 127: श्रीकृष्णको दुर्योधनका उत्तर, उसका पाण्डवोंको राज्य न देनेका निश्चय
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श्लोक 14
श्लोक
5.127.14
न हि भीष्मकृपद्रोणा: सकर्णा मधुसूदन।
देवैरपि युधा जेतुं शक्या: किमुत पाण्डवै:॥ १४॥
अनुवाद
मधुसूदन! भीष्म, द्रोण, कृपाचार्य और कर्ण को तो देवता भी युद्ध में नहीं हरा सकते; फिर पाण्डवों की तो बात ही क्या है?॥14॥
Madhusudana! Even the gods cannot defeat Bhishma, Drona, Kripacharya and Karna in battle; then what about the Pandavas?॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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