श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 127: श्रीकृष्णको दुर्योधनका उत्तर, उसका पाण्डवोंको राज्य न देनेका निश्चय  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.127.1 
वैशम्पायन उवाच
श्रुत्वा दुर्योधनो वाक्यमप्रियं कुरुसंसदि।
प्रत्युवाच महाबाहुं वासुदेवं यशस्विनम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! कौरव सभा में इन अप्रिय वचनों को सुनकर दुर्योधन ने प्रसिद्ध महाबाहु वसुदेवनन्दन श्रीकृष्ण से इस प्रकार कहा -॥
 
Vaishampayanji says – Janamejaya! Hearing these unpleasant words in the Kaurava assembly, Duryodhana replied to the famous mighty-armed Vasudevanandan Shri Krishna in this way -॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)