श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 125: भीष्म, द्रोण, विदुर और धृतराष्ट्रका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  5.125.27 
शमं चेद् याचमानं त्वं प्रत्याख्यास्यसि केशवम्।
त्वदर्थमभिजल्पन्तं न तवास्त्यपराभव:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
"यदि तुम भगवान श्रीकृष्ण का अनादर करोगे, जो शांति के लिए प्रार्थना कर रहे हैं और जो तुम्हारे लिए कल्याणकारी बातें बता रहे हैं, तथा उनकी आज्ञा का उल्लंघन करोगे, तो तुम्हारी अवश्य ही पराजय होगी।" ॥27॥
 
"If you disrespect Lord Krishna who is praying for peace and who is telling you things that are good for you, and disobey his commands, then you will surely be defeated." ॥27॥
 
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि भगवद्यानपर्वणि भीष्मादिवाक्ये पञ्चविंशत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १२५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत भगवद्यानपर्वमें भीष्म आदिके वचनोंसे सम्बन्ध रखनेवाला एक सौ पचीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १२५॥

[दाक्षिणात्य अधिक पाठका आधा श्लोक मिलाकर कुल २७ १/२ श्लोक हैं।]
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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