Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.124.14: परन्तु यदि तुम इस हानिकारक हठ को त्याग दोगे, तो अपने कल्याण के साथ-साथ अपने भाइयों, सेवकों और मित्रों की भी बड़ी सेवा करोगे॥14॥ | mahabharat अध्याय 5.124: धृतराष्ट्रके अनुरोधसे भगवान् श्रीकृष्णका दुर्योधनको समझाना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तमनर्थं परिहरन्नात्मश्रेय: करिष्यसि।
भ्रातॄणामथ भृत्यानां मित्राणां च परंतप॥ १४॥
अनुवाद
परन्तु यदि तुम इस हानिकारक हठ को त्याग दोगे, तो अपने कल्याण के साथ-साथ अपने भाइयों, सेवकों और मित्रों की भी बड़ी सेवा करोगे॥14॥
But if you give up this harmful obstinacy, then besides your own welfare, you will also do a great service to your brothers, servants and friends.॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥