श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 122: सत्संग एवं दौहित्रोंके पुण्यदानसे ययातिका पुन: स्वर्गारोहण  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.122.3 
ततो वसुमना: पूर्वमुच्चैरुच्चारयन् वच:।
ख्यातो दानपतिर्लोके व्याजहार नृपं तदा॥ ३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् दानपति नाम से जगत् में प्रसिद्ध राजा वसुमान ने पहले ऊँचे स्वर में वचन कहते हुए महाराज ययाति से इस प्रकार कहा-॥3॥
 
After that, King Vasumana, famous in the world by the name of Daanapati, first uttering the words in a loud voice, spoke to Maharaj Yayati in this manner – ॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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