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mahabharat 5.121.18: उन राजाओं ने कहा - हे महात्मन! आपकी मनोकामना पूर्ण हो। आपको हमारे सभी यज्ञों और धर्म का फल प्राप्त हो।   |   mahabharat अध्याय 5.121: ययातिका स्वर्गलोकसे पतन और उनके दौहित्रों, पुत्री तथा गालव मुनिका उन्हें पुन: स्वर्गलोकमें पहुँचानेके लिये अपना-अपना पुण्य देनेके लिये उद्यत होना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 121: ययातिका स्वर्गलोकसे पतन और उनके दौहित्रों, पुत्री तथा गालव मुनिका उन्हें पुन: स्वर्गलोकमें पहुँचानेके लिये अपना-अपना पुण्य देनेके लिये उद्यत होना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  5.121.18 
राजान ऊचु:
सत्यमेतद् भवतु ते काङ्क्षितं पुरुषर्षभ।
सर्वेषां न: क्रतुफलं धर्मश्च प्रतिगृह्यताम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
उन राजाओं ने कहा - हे महात्मन! आपकी मनोकामना पूर्ण हो। आपको हमारे सभी यज्ञों और धर्म का फल प्राप्त हो।
 
Those kings said - O great man! May your desire be fulfilled. May you receive the fruits of all our sacrifices and the Dharma.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)