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mahabharat 5.121.17: ययाति बोले - मैं राजा ययाति हूँ। मेरा पुण्य क्षीण हो गया है, इसलिए मैं स्वर्ग से गिर गया हूँ। गिरते समय मैं सोच रहा था कि मुझे सत्पुरुषों के बीच गिरना चाहिए। इसलिए मैं आप लोगों के बीच आ गया हूँ॥ 17॥   |   mahabharat अध्याय 5.121: ययातिका स्वर्गलोकसे पतन और उनके दौहित्रों, पुत्री तथा गालव मुनिका उन्हें पुन: स्वर्गलोकमें पहुँचानेके लिये अपना-अपना पुण्य देनेके लिये उद्यत होना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 121: ययातिका स्वर्गलोकसे पतन और उनके दौहित्रों, पुत्री तथा गालव मुनिका उन्हें पुन: स्वर्गलोकमें पहुँचानेके लिये अपना-अपना पुण्य देनेके लिये उद्यत होना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.121.17 
ययातिरुवाच
ययातिरस्मि राजर्षि: क्षीणपुण्यश्च्युतो दिव:।
पतेयं सत्स्विति ध्यायन् भवत्सु पतितस्तत:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
ययाति बोले - मैं राजा ययाति हूँ। मेरा पुण्य क्षीण हो गया है, इसलिए मैं स्वर्ग से गिर गया हूँ। गिरते समय मैं सोच रहा था कि मुझे सत्पुरुषों के बीच गिरना चाहिए। इसलिए मैं आप लोगों के बीच आ गया हूँ॥ 17॥
 
Yayati said - I am King Yayati. I have fallen from heaven because my virtue has diminished. While falling, I was thinking that I should fall among the good men. So I have come among you people.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)