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mahabharat 5.120.14: राजन! महाराज ययाति महर्षियों के समान पुण्यात्मा और तपस्वी थे। वे स्वर्गलोक में गए और वहाँ उत्तम फलों का भोग करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 5.120: माधवीका वनमें जाकर तप करना तथा ययातिका स्वर्गमें जाकर सुखभोगके पश्चात् मोहवश तेजोहीन होना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 120: माधवीका वनमें जाकर तप करना तथा ययातिका स्वर्गमें जाकर सुखभोगके पश्चात् मोहवश तेजोहीन होना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  5.120.14 
महीपते नरपतिर्ययाति: स्वर्गमास्थित:।
महर्षिकल्पो नृपति: स्वर्गाग्रॺफलभुग् विभु:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
राजन! महाराज ययाति महर्षियों के समान पुण्यात्मा और तपस्वी थे। वे स्वर्गलोक में गए और वहाँ उत्तम फलों का भोग करने लगे।
 
Rajan! Maharaj Yayati was a virtuous soul and an ascetic like the Maharishis. They went to heaven and started enjoying the best fruits there. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)