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mahabharat 5.119.7: राजा ने पुण्डरीक नामक यज्ञ किया और उन सभी घोड़ों को ब्राह्मणों में दक्षिणा के रूप में बाँट दिया। तत्पश्चात राजाओं ने उनसे दो-दो सौ घोड़े खरीदकर अपने पास रख लिए।   |   mahabharat अध्याय 5.119: गालवका छ: सौ घोड़ोंके साथ माधवीको विश्वामित्रजीकी सेवामें देना और उनके द्वारा उसके गर्भसे अष्टक नामक पुत्रकी उत्पत्ति होनेके बाद उस कन्याको ययातिके यहाँ लौटा देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 119: गालवका छ: सौ घोड़ोंके साथ माधवीको विश्वामित्रजीकी सेवामें देना और उनके द्वारा उसके गर्भसे अष्टक नामक पुत्रकी उत्पत्ति होनेके बाद उस कन्याको ययातिके यहाँ लौटा देना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.119.7 
इष्ट्वा ते पुण्डरीकेण दत्ता राज्ञा द्विजातिषु।
तेभ्यो द्वे द्वे शते क्रीत्वा प्राप्ते तै: पार्थिवैस्तदा॥ ७॥
 
 
अनुवाद
राजा ने पुण्डरीक नामक यज्ञ किया और उन सभी घोड़ों को ब्राह्मणों में दक्षिणा के रूप में बाँट दिया। तत्पश्चात राजाओं ने उनसे दो-दो सौ घोड़े खरीदकर अपने पास रख लिए।
 
‘The king performed a sacrifice called Pundarik and distributed all those horses among the Brahmins as dakshina. Thereafter the kings bought two hundred horses each from them and kept them with themselves.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)