पुरा हि कान्यकुब्जे वै गाधे: सत्यवतीं सुताम्।
भार्यार्थेऽवरयत् कन्यामृचीकस्तेन भाषित:॥ ४॥
अनुवाद
पूर्वकाल की कथा है, कान्यकुब्ज में ऋषि ऋचीक ने राजा गाधि की पुत्री सत्यवती को अपनी पत्नी बनाने के लिए राजा से मांगा। तब राजा ने ऋचीक से कहा -॥4॥
‘It is a story of the past, in Kanyakubja, sage Richik asked the king for Satyavati, the daughter of king Gadhi, to make her his wife. Then the king said to Richik -॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥