श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 119: गालवका छ: सौ घोड़ोंके साथ माधवीको विश्वामित्रजीकी सेवामें देना और उनके द्वारा उसके गर्भसे अष्टक नामक पुत्रकी उत्पत्ति होनेके बाद उस कन्याको ययातिके यहाँ लौटा देना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.119.4 
पुरा हि कान्यकुब्जे वै गाधे: सत्यवतीं सुताम्।
भार्यार्थेऽवरयत् कन्यामृचीकस्तेन भाषित:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
पूर्वकाल की कथा है, कान्यकुब्ज में ऋषि ऋचीक ने राजा गाधि की पुत्री सत्यवती को अपनी पत्नी बनाने के लिए राजा से मांगा। तब राजा ने ऋचीक से कहा -॥4॥
 
‘It is a story of the past, in Kanyakubja, sage Richik asked the king for Satyavati, the daughter of king Gadhi, to make her his wife. Then the king said to Richik -॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)