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mahabharat 5.119.3: तब वक्ताओं में श्रेष्ठ गरुड़ ने गालव से कहा, 'अब तुम्हें ऐसा नहीं करना चाहिए, क्योंकि तुम्हारी इच्छा पूरी नहीं होगी।   |   mahabharat अध्याय 5.119: गालवका छ: सौ घोड़ोंके साथ माधवीको विश्वामित्रजीकी सेवामें देना और उनके द्वारा उसके गर्भसे अष्टक नामक पुत्रकी उत्पत्ति होनेके बाद उस कन्याको ययातिके यहाँ लौटा देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 119: गालवका छ: सौ घोड़ोंके साथ माधवीको विश्वामित्रजीकी सेवामें देना और उनके द्वारा उसके गर्भसे अष्टक नामक पुत्रकी उत्पत्ति होनेके बाद उस कन्याको ययातिके यहाँ लौटा देना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.119.3 
सुपर्णस्त्वब्रवीदेनं गालवं वदतां वर:।
प्रयत्नस्ते न कर्तव्यो नैष सम्पत्स्यते तव॥ ३॥
 
 
अनुवाद
तब वक्ताओं में श्रेष्ठ गरुड़ ने गालव से कहा, 'अब तुम्हें ऐसा नहीं करना चाहिए, क्योंकि तुम्हारी इच्छा पूरी नहीं होगी।
 
Then Garuda, the best of speakers, said to Galava, 'Now you should not attempt this, because your desire will not be fulfilled.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)