ऐसा कहकर गालव ने सर्पभक्षी गरुड़ की अनुमति ली और राजकुमारी को उसके पिता ययाति के पास लौटाकर वन में चले गये।
Having said this, Galava took the permission of the snake-eater Garuda and after returning the princess to her father Yayati, went back to the forest.
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि भगवद्यानपर्वणि गालवचरिते एकोनविंशत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ ११९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत भगवद्यानपर्वमें गालवचरित्रविषयक एक सौ उन्नीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ११९॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥