श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 119: गालवका छ: सौ घोड़ोंके साथ माधवीको विश्वामित्रजीकी सेवामें देना और उनके द्वारा उसके गर्भसे अष्टक नामक पुत्रकी उत्पत्ति होनेके बाद उस कन्याको ययातिके यहाँ लौटा देना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.119.17 
प्रतिगृह्णामि ते कन्यामेकपुत्रफलाय वै।
अश्वाश्चाश्रममासाद्य चरन्तु मम सर्वश:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
अच्छा, अब मैं पुत्र-फल पाने के लिए इस कन्या को तुमसे स्वीकार करता हूँ। ये घोड़े मेरे आश्रम में आकर सर्वत्र चरें।'॥17॥
 
Okay, now I accept this girl from you to get the fruit of a son. Let these horses come to my ashram and graze everywhere.'॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)