vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 5: उद्योग पर्व
»
अध्याय 119: गालवका छ: सौ घोड़ोंके साथ माधवीको विश्वामित्रजीकी सेवामें देना और उनके द्वारा उसके गर्भसे अष्टक नामक पुत्रकी उत्पत्ति होनेके बाद उस कन्याको ययातिके यहाँ लौटा देना
»
श्लोक 17
श्लोक
5.119.17
प्रतिगृह्णामि ते कन्यामेकपुत्रफलाय वै।
अश्वाश्चाश्रममासाद्य चरन्तु मम सर्वश:॥ १७॥
अनुवाद
अच्छा, अब मैं पुत्र-फल पाने के लिए इस कन्या को तुमसे स्वीकार करता हूँ। ये घोड़े मेरे आश्रम में आकर सर्वत्र चरें।'॥17॥
Okay, now I accept this girl from you to get the fruit of a son. Let these horses come to my ashram and graze everywhere.'॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×