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mahabharat 5.119.16: गालव! तुमने इसे मुझे यहीं क्यों नहीं दे दिया, जिससे मुझे अपने वंश को आगे बढ़ाने के लिए चार पुत्र मिल जाते?   |   mahabharat अध्याय 5.119: गालवका छ: सौ घोड़ोंके साथ माधवीको विश्वामित्रजीकी सेवामें देना और उनके द्वारा उसके गर्भसे अष्टक नामक पुत्रकी उत्पत्ति होनेके बाद उस कन्याको ययातिके यहाँ लौटा देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 119: गालवका छ: सौ घोड़ोंके साथ माधवीको विश्वामित्रजीकी सेवामें देना और उनके द्वारा उसके गर्भसे अष्टक नामक पुत्रकी उत्पत्ति होनेके बाद उस कन्याको ययातिके यहाँ लौटा देना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  5.119.16 
किमियं पूर्वमेवेह न दत्ता मम गालव।
पुत्रा ममैव चत्वारो भवेयु: कुलभावना:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
गालव! तुमने इसे मुझे यहीं क्यों नहीं दे दिया, जिससे मुझे अपने वंश को आगे बढ़ाने के लिए चार पुत्र मिल जाते?
 
Gaalava! Why did you not give it to me here itself, so that I could have got four sons to carry forward my lineage.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)