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mahabharat 5.119.1: नारदजी कहते हैं- उस समय विनतानन्दनागरुड़ ने मुस्कराते हुए ऋषि गालव से कहा- 'ब्रह्मन्! यह बड़े सौभाग्य की बात है कि आज मैं आपको यहाँ अपना सम्पूर्ण कार्य करते हुए देख रहा हूँ।'   |   mahabharat अध्याय 5.119: गालवका छ: सौ घोड़ोंके साथ माधवीको विश्वामित्रजीकी सेवामें देना और उनके द्वारा उसके गर्भसे अष्टक नामक पुत्रकी उत्पत्ति होनेके बाद उस कन्याको ययातिके यहाँ लौटा देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 119: गालवका छ: सौ घोड़ोंके साथ माधवीको विश्वामित्रजीकी सेवामें देना और उनके द्वारा उसके गर्भसे अष्टक नामक पुत्रकी उत्पत्ति होनेके बाद उस कन्याको ययातिके यहाँ लौटा देना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.119.1 
नारद उवाच
गालवं वैनतेयोऽथ प्रहसन्निदमब्रवीत्।
दिष्टॺा कृतार्थं पश्यामि भवन्तमिह वै द्विज॥ १॥
 
 
अनुवाद
नारदजी कहते हैं- उस समय विनतानन्दनागरुड़ ने मुस्कराते हुए ऋषि गालव से कहा- 'ब्रह्मन्! यह बड़े सौभाग्य की बात है कि आज मैं आपको यहाँ अपना सम्पूर्ण कार्य करते हुए देख रहा हूँ।'
 
Naradji says- At that time Vintanandanagaruda smilingly said to sage Galav- 'Brahman! It is a matter of great fortune that today I am seeing you here doing all your work.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)