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श्लोक  5.117.20 
निर्यातयतु मे कन्यां भवांस्तिष्ठन्तु वाजिन:।
यावदन्यत्र गच्छामि शुल्कार्थं पृथिवीपते॥ २०॥
 
 
अनुवाद
"पृथ्वीनाथ! अब कृपया राजकुमारी मुझे लौटा दीजिए। आपके दिए घोड़े अभी आपके पास ही रहें। मैं शुल्क लेने कहीं और जा रहा हूँ।"
 
‘Prithvi Nath! Now please return the princess to me. The horses given by you should remain with you for now. I am going elsewhere to collect the fee.’
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)