श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 117: दिवोदासका ययातिकन्या माधवीके गर्भसे प्रतर्दन नामक पुत्र उत्पन्न करना  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  5.117.1-2 
गालव उवाच
महावीर्यो महीपाल: काशीनामीश्वर: प्रभु:।
दिवोदास इति ख्यातो भैमसेनिर्नराधिप:॥ १॥
तत्र गच्छावहे भद्रे शनैरागच्छ मा शुच:।
धार्मिक: संयमे युक्त: सत्ये चैव जनेश्वर:॥ २॥
 
 
अनुवाद
मार्ग में गलवान ने राजकुमारी माधवी से कहा- भद्रे! काशी के अधिपति भीमसेन कुमार, पराक्रमी और यशस्वी राजा दिवोदास हैं। हम दोनों उनके पास चलें। तुम धीरे-धीरे आओ। मन में किसी प्रकार का शोक मत रखना। राजा दिवोदास धार्मिक, संयमी और सत्यवादी हैं। 1-2॥
 
On the way, Galvan said to princess Madhavi – Bhadre! The ruler of Kashi, Bhimsen Kumar, is a powerful king, Divodas, a mighty and famous landowner. Let us both go to him. You come slowly. Do not have any kind of sorrow in your mind. King Divodas is religious, self-controlled and truthful. 1-2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)