(श्रोण्यौ ललाटमूरू च घ्राणं चेति षडुन्नतम्।
सूक्ष्माण्यङ्गुलिपर्वाणि केशरोमनखत्वच:॥
स्वर: सत्त्वं च नाभिश्च त्रिगम्भीरं प्रचक्षते।
पाणिपादतले रक्ते नेत्रान्तौ च नखानि च॥ )
अनुवाद
दो नितंब, दो जंघाएँ, माथा और नासिका - ये छह अंग ऊँचे हैं। अँगुलियों की संधि, रोम, केश, नख और त्वचा - ये पाँच अंग सूक्ष्म हैं। वाणी, अंतःकरण और नाभि - ये तीन गंभीर कहे जा सकते हैं और हथेली, पैरों के तलवे, दाहिना नेत्र क्षेत्र, बायाँ नेत्र क्षेत्र और नख - ये पाँच अंग लाल रंग के हैं।'
‘Two buttocks, two thighs, forehead and nose – these six organs are high. Finger joints, hair, hair, nails and skin – these five organs are subtle. Voice, conscience and navel – these three can be called serious and palm, soles of the feet, right eye region, left eye region and nails – these five organs are red in colour.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥