vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 5: उद्योग पर्व
»
अध्याय 116: हर्यश्वका दो सौ श्यामकर्ण घोड़े देकर ययातिकन्याके गर्भसे वसुमना नामक पुत्र उत्पन्न करना और गालवका इस कन्याके साथ वहाँसे प्रस्थान
»
श्लोक 16
श्लोक
5.116.16
प्रतिगृह्य स तां कन्यां गालवं प्रतिनन्द्य च।
समये देशकाले च लब्धवान् सुतमीप्सितम्॥ १६॥
अनुवाद
तब राजा ने गालव ऋषि का सत्कार करके उस कन्या को स्वीकार किया और उचित समय और स्थान पर उससे इच्छित पुत्र प्राप्त किया॥16॥
Then the king, having felicitated the sage Galava, accepted the daughter, and at the appropriate time and place, received from her a desired son.॥ 16॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas