Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.113.5: उड़ता हुआ गरुड़ मुख और भुजाओं से युक्त होते हुए भी पंखहीन मांस के लोथड़े के समान हो गया। उसे उस अवस्था में देखकर गालव दुःखी हो गया और बोला -॥5॥ | mahabharat अध्याय 5.113: ऋषभ पर्वतके शिखरपर महर्षि गालव और गरुड़की तपस्विनी शाण्डिलीसे भेंट तथा गरुड़ और गालवका गुरुदक्षिणा चुकानेके विषयमें परस्पर विचार । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मांसपिण्डोपमोऽभूत् स मुखपादान्वित: खग:।
गालवस्तं तथा दृष्ट्वा विमना: पर्यपृच्छत॥ ५॥
अनुवाद
उड़ता हुआ गरुड़ मुख और भुजाओं से युक्त होते हुए भी पंखहीन मांस के लोथड़े के समान हो गया। उसे उस अवस्था में देखकर गालव दुःखी हो गया और बोला -॥5॥
The flying Garuda, though endowed with a mouth and hands, became like a lump of flesh without the wings. Seeing him in that state, Galava became sad and asked -॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥