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mahabharat 5.113.4: दो घंटे बाद गरुड़ वहाँ से जाने की इच्छा से उठे, लेकिन जागने पर उन्होंने देखा कि उनके शरीर के दोनों पंख विहीन हो गए हैं।   |   mahabharat अध्याय 5.113: ऋषभ पर्वतके शिखरपर महर्षि गालव और गरुड़की तपस्विनी शाण्डिलीसे भेंट तथा गरुड़ और गालवका गुरुदक्षिणा चुकानेके विषयमें परस्पर विचार   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 113: ऋषभ पर्वतके शिखरपर महर्षि गालव और गरुड़की तपस्विनी शाण्डिलीसे भेंट तथा गरुड़ और गालवका गुरुदक्षिणा चुकानेके विषयमें परस्पर विचार  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.113.4 
मुहूर्तात् प्रतिबुद्धस्तु सुपर्णो गमनेप्सया।
अथ भ्रष्टतनूजाङ्गमात्मानं ददृशे खग:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
दो घंटे बाद गरुड़ वहाँ से जाने की इच्छा से उठे, लेकिन जागने पर उन्होंने देखा कि उनके शरीर के दोनों पंख विहीन हो गए हैं।
 
After two hours, Garuda woke up with the desire to leave from there. On waking up, he saw that his body was devoid of both wings.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)