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mahabharat 5.112.11: हे गरुड़, धीरे चलो ताकि ब्राह्मण-हत्या न हो। इस समय मुझे न सूर्य दिखाई दे रहा है, न दिशाएँ, न आकाश।   |   mahabharat अध्याय 5.112: गरुड़की पीठपर बैठकर पूर्व दिशाकी ओर जाते हुए गालवका उनके वेगसे व्याकुल होना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 112: गरुड़की पीठपर बैठकर पूर्व दिशाकी ओर जाते हुए गालवका उनके वेगसे व्याकुल होना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.112.11 
शनै: स तु भवान् यातु ब्रह्मवध्यामनुस्मरन्।
न दृश्यते रविस्तात न दिशो न च खं खग॥ ११॥
 
 
अनुवाद
हे गरुड़, धीरे चलो ताकि ब्राह्मण-हत्या न हो। इस समय मुझे न सूर्य दिखाई दे रहा है, न दिशाएँ, न आकाश।
 
Dear Garuda, walk slowly so that you do not commit the murder of a brahmin. At this time I cannot see the sun, nor the directions, nor the sky.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)