Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.111.16-18h: द्विजश्रेष्ठ! इस दिशा में धाम नामक प्रसिद्ध सत्यवादी महात्मा मुनि श्री गंगामहाद्वार की रक्षा करते हैं। उनकी मूर्ति, आकार और संचित तप की सीमा कोई नहीं जानता। गालव! वे अपनी इच्छानुसार हजारों वर्षों तक जीवन का आनंद लेते हैं। | mahabharat अध्याय 5.111: उत्तर दिशाका वर्णन । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अत्र गङ्गामहाद्वारं रक्षन्ति द्विजसत्तम॥ १६॥
धामा नाम महात्मानो मुनय: सत्यवादिन:।
न तेषां ज्ञायते मूर्तिर्नाकृतिर्न तपश्चितम्॥ १७॥
परिवर्तसहस्राणि कामभोज्यानि गालव।
अनुवाद
द्विजश्रेष्ठ! इस दिशा में धाम नामक प्रसिद्ध सत्यवादी महात्मा मुनि श्री गंगामहाद्वार की रक्षा करते हैं। उनकी मूर्ति, आकार और संचित तप की सीमा कोई नहीं जानता। गालव! वे अपनी इच्छानुसार हजारों वर्षों तक जीवन का आनंद लेते हैं।
Dwijshreshtha! In this direction, the famous Satyavadi Mahatma Muni named Dham protects Shri Gangamahadwar. No one knows the extent of his idol, shape and accumulated penance. Galav! They enjoy life for thousands of years as per their wish.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥