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mahabharat 5.111.14-15h: इस दिशा में देवी अरुंधति और सप्तऋषि प्रकट होते हैं। इसी दिशा में स्वाति नक्षत्र रहता है और यहीं इसका उदय होता है।   |   mahabharat अध्याय 5.111: उत्तर दिशाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 111: उत्तर दिशाका वर्णन  »  श्लोक 14-15h
 
 
श्लोक  5.111.14-15h 
अत्र ते ऋषय: सप्त देवी चारुन्धती तथा॥ १४॥
अत्र तिष्ठति वै स्वातिरत्रास्या उदय: स्मृत:।
 
 
अनुवाद
इस दिशा में देवी अरुंधति और सप्तऋषि प्रकट होते हैं। इसी दिशा में स्वाति नक्षत्र रहता है और यहीं इसका उदय होता है।
 
In this direction Arundhati Devi and the Saptarishi appear. In this direction Swati Nakshatra resides and it rises here. 14 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)