श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 11: देवताओं तथा ऋषियोंके अनुरोधसे राजा नहुषका इन्द्रके पदपर अभिषिक्त होना एवं काम-भोगमें आसक्त होना और चिन्तामें पड़ी हुई इन्द्राणीको बृहस्पतिका आश्वासन  »  श्लोक 7-8
 
 
श्लोक  5.11.7-8 
देवदानवयक्षाणामृषीणां रक्षसां तथा।
पितृगन्धर्वभूतानां चक्षुर्विषयवर्तिनाम्॥ ७॥
तेज आदास्यसे पश्यन् बलवांश्च भविष्यसि।
धर्मं पुरस्कृत्य सदा सर्वलोकाधिपो भव॥ ८॥
 
 
अनुवाद
‘देवता, दानव, यक्ष, ऋषि, राक्षस, पितर, गंधर्व और भूत-जो भी तुम्हारे नेत्रों के सामने आएँगे, तुम उनका तेज हर लोगे और शक्तिशाली हो जाओगे। इसलिए धर्म को सदैव अपने सामने रखते हुए तुम समस्त लोकों के अधिपति बनो।’ 7-8.
 
‘Gods, demons, yakshas, ​​sages, demons, ancestors, Gandharvas and ghosts – whoever comes in front of your eyes, you will take away their glory and become powerful. Therefore, keeping Dharma always in front of you, you should become the ruler of all the worlds. 7-8.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)