श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 11: देवताओं तथा ऋषियोंके अनुरोधसे राजा नहुषका इन्द्रके पदपर अभिषिक्त होना एवं काम-भोगमें आसक्त होना और चिन्तामें पड़ी हुई इन्द्राणीको बृहस्पतिका आश्वासन  »  श्लोक 5-6
 
 
श्लोक  5.11.5-6 
तमब्रुवन् पुन: सर्वे देवा ऋषिपुरोगमा:।
अस्माकं तपसा युक्त: पाहि राज्यं त्रिविष्टपे॥ ५॥
परस्परभयं घोरमस्माकं हि न संशय:।
अभिषिच्यस्व राजेन्द्र भव राजा त्रिविष्टपे॥ ६॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर सभी देवताओं और ऋषियों ने उनसे पुनः कहा - 'राजन्! आप हमारी तपस्या में सम्मिलित होकर स्वर्ग का राज्य करें। इसमें संदेह नहीं कि हम सभी एक-दूसरे से अत्यंत भयभीत हैं। अतः आप अपना अभिषेक कराकर स्वर्ग के राजा बनें।' 5-6.
 
Hearing this, all the gods and sages again said to him - 'King! You should rule the kingdom of heaven by joining our penance. There is no doubt that each one of us is extremely afraid of the other. Therefore, you should get yourself anointed and become the king of heaven. 5-6.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)