श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 11: देवताओं तथा ऋषियोंके अनुरोधसे राजा नहुषका इन्द्रके पदपर अभिषिक्त होना एवं काम-भोगमें आसक्त होना और चिन्तामें पड़ी हुई इन्द्राणीको बृहस्पतिका आश्वासन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  5.11.26 
अथ शुश्राव नहुष: शक्राणीं शरणं गताम्।
बृहस्पतेरङ्गिरसश्चुक्रोध स नृपस्तदा॥ २६॥
 
 
अनुवाद
जब राजा नहुष को पता चला कि इन्द्राणी ने अंगिरा के पुत्र बृहस्पति की शरण ली है, तो वे बहुत क्रोधित हुए।
 
When King Nahusha heard that Indrani had taken refuge with Brihaspati, the son of Angira, he became very angry.
 
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि सेनोद्योगपर्वणि इन्द्राणीभये एकादशोऽध्याय:॥ ११॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत सेनोद्योगपर्वमें इन्द्राणीभयविषयक ग्यारहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ११॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)