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mahabharat 5.108.16: इस दिशा में उदय होने वाले सूर्यदेव क्रोधित होकर दूसरों को कष्ट देने वाले, कृतघ्न लोगों और राक्षसों का नाश कर देते हैं (उनकी आयु कम कर देते हैं)॥16॥   |   mahabharat अध्याय 5.108: गरुड़का गालवसे पूर्व दिशाका वर्णन करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 108: गरुड़का गालवसे पूर्व दिशाका वर्णन करना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  5.108.16 
अत्राहिता: कृतघ्नाश्च मानुषाश्चासुराश्च ये।
उदयंस्तान् हि सर्वान् वै क्रोधाद्धन्ति विभावसु:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
इस दिशा में उदय होने वाले सूर्यदेव क्रोधित होकर दूसरों को कष्ट देने वाले, कृतघ्न लोगों और राक्षसों का नाश कर देते हैं (उनकी आयु कम कर देते हैं)॥16॥
 
The Sun God rising in this direction angrily destroys (shortens the lifespan of) all those who harm others, the ungrateful people and the demons.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)