श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 107: गालवकी चिन्ता और गरुड़का आकर उन्हें आश्वासन देना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.107.1 
नारद उवाच
एवमुक्तस्तदा तेन विश्वामित्रेण धीमता।
नास्ते न शेते नाहारं कुरुते गालवस्तदा॥ १॥
 
 
अनुवाद
नारदजी बोले - हे राजन! मुनि विश्वामित्र के ऐसा कहने के बाद गालव ऋषि ने न तो कहीं बैठना, न सोना और न ही भोजन करना शुरू किया।
 
Narada said - O King! After the wise Visvamitra said this, sage Galav did not sit, sleep or eat anywhere from then on.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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