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श्लोक 5.106.22  |
दक्षिणाभिरुपेतं हि कर्म सिद्धॺति मानद।
दक्षिणानां हि दाता वै अपवर्गेण युज्यते॥ २२॥ |
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| अनुवाद |
| माननीय! दक्षिणा देकर किया गया कार्य ही सफल होता है। दक्षिणा देने वाले को ही सफलता मिलती है। |
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| ‘Honourable! Only the work done with dakshina (gift) is successful. Only the person who gives dakshina (gift) gets success. |
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