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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 106: नारदजीका दुर्योधनको समझाते हुए धर्मराजके द्वारा विश्वामित्रजीकी परीक्षा तथा गालवके विश्वामित्रसे गुरुदक्षिणा माँगनेके लिये हठका वर्णन
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श्लोक 10
श्लोक
5.106.10
विश्वामित्रोऽथ सम्भ्रान्त: श्रपयामास वै चरुम्।
परमान्नस्य यत्नेन न च तं प्रत्यपालयत्॥ १०॥
अनुवाद
विश्वामित्र जी ने उन्हें उत्तम भोजन कराने के लिए बड़े यत्न से चरूपक तैयार करना आरम्भ किया; परंतु ये अतिथि देवता उनकी प्रतीक्षा न कर सके॥10॥
Viswamitra ji eagerly started preparing charupaka with great effort to serve them the best food; but these guest gods could not wait for him.॥ 10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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