Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.105.9: देवेश्वर! त्रिलोकीनाथ! जब तक आप यहाँ हैं, भगवान विष्णु भी मेरी जीविका रोकने का कारण नहीं बन सकते, क्योंकि वसव! तीनों लोकों के राज्य का भार सदैव आप पर ही रहता है॥9॥   |   mahabharat अध्याय 5.105: भगवान‍् विष्णुके द्वारा गरुड़का गर्वभंजन तथा दुर्योधनद्वारा कण्व मुनिके उपदेशकी अवहेलना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 105: भगवान‍् विष्णुके द्वारा गरुड़का गर्वभंजन तथा दुर्योधनद्वारा कण्व मुनिके उपदेशकी अवहेलना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  5.105.9 
त्वयि तिष्ठति देवेश न विष्णु: कारणं मम।
त्रैलोक्यराज राज्यं हि त्वयि वासव शाश्वतम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
देवेश्वर! त्रिलोकीनाथ! जब तक आप यहाँ हैं, भगवान विष्णु भी मेरी जीविका रोकने का कारण नहीं बन सकते, क्योंकि वसव! तीनों लोकों के राज्य का भार सदैव आप पर ही रहता है॥9॥
 
Deveshwar! Trilokinath! As long as you are here even Lord Vishnu cannot be the reason for stopping my livelihood because Vasava! The burden of the kingdom of the three worlds is always on you.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)